#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

आजकल,..  जितने बड़े मिले

धोखे के ढेर पर,..  खड़े मिले

हीरे के भाव,.. काँच है बिका

हीरे तो,…. कूड़े में पड़े मिले

मख़मलों में,ढकी थी विष्ठा

टुच्चे,…. अर्श पर चढ़े मिले

न्याय था,धनवान के गिरवी

कानून,..  जेब में पड़े  मिले

सत्तानशीन,.  लूट में मिले

और अफसर, नकचढ़े मिले

दलाल सारे,.. मौज कर रहे

किसान,फाँसी पे चढ़े मिले

तीरगी को,… मिले मानपत्र

सूर्य तो,…… पीछे खड़े मिले

“दिनेश प्रताप सिंह चौहान “

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