#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“माहिया”
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तुम जब भी जाते हो
लगता ऎसा है
जीवन ले जाते हो
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तुम फिर पछताओगे
लाखों होंगे पर
मुझसा ना पाओगे
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क्यों हमें सताते हो
हम अपना समझें
तुम क्यों ठुकराते हो
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“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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