#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

साँप नाथ हार गए,नागनाथ जीत गए
जम्हूरी प्रहसन के पांच वर्ष बीत गए
सत्ता के शिखरों पर निर्लज्जता का नाच
आँखों में पानी के पनघट सब रीत गए
सेवक बनाके जिन्हें सौंपा था लोकतंत्र
मालिक बने वो हमें बना दास क्रीत गए
सम्मोहक चितवन थी मदमाता आमंत्रण
मादक दशा में फूट अधरों से गीत गए
माया के मोहपाश में ही रहे उम्र भर
ज़र की खनक में भूल जीवन संगीत गए
सत्ता की बंदरबाँट का छिड़ा है घमासान
हार तय है जनता की चाहे जो जीत गए
“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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