#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

शत्रु मित्र नजदीकियां या फिर हो पहचान
राजनीति में किसीको स्थायी मत मान
स्थायी मत मान वरन खायेगा गच्चा
मोदी जी को आज नितीश बताते सच्चा
समझ ना आये राजनीति का गोरखधंधा
राजनीति के रंग देख गिरगिट शर्मिन्दा

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