#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

बहुत दिनों से नहीं हो रहा मौसम बेईमान
अब मौसम की जगह हो गया बेईमान इंसान
करें रक्षा अब कृपानिधान
——————————————————–
मुल्ला और पंडितों के चक्कर में नहीं रह पाते
जो साथ साथ रहना भी चाहें, राम और रहमान
करें रक्षा अब कृपानिधान
——————————————————–
यूनिवर्सिटी और डिग्रियों, ने पकड़ी ऊंचाई
किन्तु धरातल पर आ पहुंचा देखो मानव ज्ञान
करें रक्षा अब कृपानिधान
———————————————————
कई ग्रेजुएट,पोस्टग्रेजुएट शहर के हैं वाशिंदे
पर,लाइब्रेरी की जगह खुल गए पार्लर और दुकान
करें रक्षा अब कृपानिधान
———————————————————-
मंदिर और महात्मा कम थे,धर्म था लेकिन ज्यादा
किन्तु छलावे और ढोंग ने धर्म किया बदनाम
करें रक्षा अब कृपानिधान
———————————————————–
दूर दूर चाहे रहते थे ,नज़दीकी थी मन में
दूरी सात समंदर की अब,एक हो चाहे मकान
करें रक्षा अब कृपानिधान
————————————————————
गैरत और शर्म ने कर ली ,बेशर्मी से शादी
शर्मदार से ज्यादा है ,बेशर्मों का सम्मान
करें रक्षा अब कृपानिधान
————————————————————
भाग्यविधाता भारत के मुस्तक़्बिल का क्या होगा
राजनीति वैश्या है,हाक़िम करें दलाल का काम
करें रक्षा अब कृपानिधान
————————————————————
“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

96 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *