#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

बहुत दिनों से नहीं हो रहा मौसम बेईमान
अब मौसम की जगह हो गया बेईमान इंसान
करें रक्षा अब कृपानिधान
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मुल्ला और पंडितों के चक्कर में नहीं रह पाते
जो साथ साथ रहना भी चाहें, राम और रहमान
करें रक्षा अब कृपानिधान
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यूनिवर्सिटी और डिग्रियों, ने पकड़ी ऊंचाई
किन्तु धरातल पर आ पहुंचा देखो मानव ज्ञान
करें रक्षा अब कृपानिधान
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कई ग्रेजुएट,पोस्टग्रेजुएट शहर के हैं वाशिंदे
पर,लाइब्रेरी की जगह खुल गए पार्लर और दुकान
करें रक्षा अब कृपानिधान
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मंदिर और महात्मा कम थे,धर्म था लेकिन ज्यादा
किन्तु छलावे और ढोंग ने धर्म किया बदनाम
करें रक्षा अब कृपानिधान
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दूर दूर चाहे रहते थे ,नज़दीकी थी मन में
दूरी सात समंदर की अब,एक हो चाहे मकान
करें रक्षा अब कृपानिधान
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गैरत और शर्म ने कर ली ,बेशर्मी से शादी
शर्मदार से ज्यादा है ,बेशर्मों का सम्मान
करें रक्षा अब कृपानिधान
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भाग्यविधाता भारत के मुस्तक़्बिल का क्या होगा
राजनीति वैश्या है,हाक़िम करें दलाल का काम
करें रक्षा अब कृपानिधान
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“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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