#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

भूख, भ्रष्टाचार है, बदअमनी है, बेकारी है

उनकी नज़रों में ये कहना द्रोह की तैयारी है

मुनीमों ने मालिकों की ज़र का कर डाला ग़बन

और मालिक पूछ ले तो, देश से गद्दारी है

हमने जब भी आइना उनको दिखाया, उन्होंने

अपनी बद्शक्ली की तोहमत, आईने पे डाली है

हम अँधेरे में रहे, ये देश रोशन हो गया !

बाज़ीगरी है हाक़िमों की, आंकड़ा सरकारी है

हिफ़ाज़त में मुब्तिला, सरकार है, उनके लिए

ज़िन्दगी जिनकी धरा को, बोझ लगती भारी है

सिसकने और रोने के, मौके बहुत हैं देश में

फ़तवा है उनको जो करता, गाने की तैयारी है

“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

 

81 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.