#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

नेता का है, अफसर का है, ईमान ये नीरव

इस देश में हर दिल का है अरमान ये नीरव ।

जादू का पिटारा हुआ ,हर रोज नया खेल

दुनिया में, मेरे देश का, गुमान ये नीरव ।

भ्रष्टनारायनों  की कथा का है  प्रसंग

भ्रष्टों का मेरे देश में, यजमान ये नीरव ।

हर बदन है उघडा हुआ, हर व्यवस्था नंगी

सत्ता की नंगई का, है हम्माम ये नीरव ।

तेरा है  न मेरा है पूरे,  देश का  गौरव

भारत महान की है ,एक ढलान ये नीरव ।

हम तुम सभी नीरव हैं सारे देश में नीरव

अब होगा मेरे देश की ,पहचान ये नीरव ।

आईना है, जो देख सको, गौर से देखो

इस व्यवस्था पे काला एक निशान ये नीरव ।

“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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