#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

हाथ मिल रहे हैं दुनिया में दिल मुश्किल से मिलते हैं

दीवारें तो बन जातीं हैं घर मुश्किल से मिलते हैं

कुछ कदमों तो साथ चलें फिर अपनी राह पकड़ते हैं

मंजिल तक जो साथ चलें रहबर मुश्किल से मिलते हैं

मन बहलाव मनोरंजन का साधन बने आज शायर

समाज का दर्पण बनते शायर मुश्किल से मिलते हैं

ख़ुद भी जीने की इच्छा और जीने दो का भाव रखें

मिलते हैं वो इस दुनिया में पर मुश्किल से मिलते हैं

जीवन यापन की बारीकी सिखलाने वाले हैं बहुत

जीवन क्या?समझाएं वो गुरुवर मुश्किल से मिलते हैं

“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

 

 

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