#Kavita by Dipak Charlei

आपको ताज्जुब होगा ये जानकर

एक रात मैं सो रहा था  मच्छरदानी तानकर

बहुत बड़ा सन्देश है इस कहानी में

अाठ- दस  आतंकवादी रूपी मच्छर

घुस आये मेरी मच्छरदानी में

एक मच्छर मेरे के पास आकर

बोला अपना Ak 47 रूपी डंक लगाकर

‘ चार्ली ” जी  जरा उठकर  बैठिये

हम हैं पाकिस्तानी घुसपैठिये

सच ,सच बताईये

हमे आप से खुफिया जानकारी चाहिए

हम एक नही कई साथी हैं

इनमें से दो आत्मघाती हैं

मार सकते मर सकते हैं

हम कुछ भी कर सकते हैं

हमारा पत्थर का कलेजा है

हमें यहाँ हमला करने हमारे आका

अजहर मसूद ने भेजा है

इतनी बात सुनकर मौका मिलते ही

दो तो मैंने आंँन दा स्पाट मसल दिये

दो- तीन उडे और चल दिये

मैंने कहा रूको तुम्हारी———

खुफिया जानकारी देता हूँ सारी

किससे बात कर रहे हो जानते हो

निर्दोषो और बेकसूरो की जान लेने को

सालो बहादुरी मानते हो

बेकसूरों की जान लेने से क्या फायदा

ऊपर से जिम्मेदारी भी

लेते हो “बाकायदा”

मैं जैश ए, मोहम्मद

मैं ” अलकायदा ”

अरे! मारना ही है तो अपने अन्दर

छिपे शैतान को मारो

इन्सान को मत मारो

सारी दुनिया जानती है”आतंकवाद ”

कहाँ पलता है

इसका पता तुम्हें तब चलता है

जब इस आग में खुद का पैर जलता है

अन्तर्राष्टृीय स्तर पर तुम्हारी क्या छवि है

जानते हो

धौके से शीश काटकर ले जाने को

बहादुरी मानते हो

हमारे जवान सीमा पर अपने कदम

पीछे नही हटा सकते हैं

सर झुका नही सकते

अपना सर कटा सकते हैं

बहादुर हो तो सामने से आओ

घुसा के छोडेंगे तुम्हें चुहे के बिल में

इतनी जल्दी भूल गए

क्या हुआ था ” कारगिल ” में

कश्मीर तो तुम्हें नहीं देंगें कसम खा चुके हैं

ये बात तो हम पहले 1971 में भी बता चुके हैं

इस बार कुछ कहे तो जबाब मुँहतोड दो

बहादुरी दिखाने का इतना ही बड़ा शौक है

तो पत्थरबाजों का सहारा लेना छोड़ दो

भूल गए क्या किया था एक नाईट में

पिछले दिनों सर्जिकल स्टृाईक में

तुम क्या सोच रहे हो

हमारे पी० एम० सोते हैं

अरे! वो अब तक ये ही सोच रहे हैं कि

युद्ध के परिणाम भयंकर होते हैं

वो अमन और शांति चाहते हैं

तभी तो बिना बुलाय नवाज शरीफ

से मिलने पहुँच जाते हैं

इसका हल बात चीत से निकालना चाहते है

पर तुम कहाँ  हमें जानते हो

लातों के भूत हो

बातों से कहाँ मानते हो

जब- जब अपने नापाक कदम इस ओर बढाओगे

माँ कसम ऐसे ही कुचल दिये जाओगे

माफ करना दोस्तों आज मैं कुछ भावनाओं

में ज्यादा ही बह गया

हास्य व्यंग्य के साथ,साथ कुछ बातें

वीर रस की भी कह गया

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