#Kavita by Dipak Charlei Hasya Kavi

” ठोक दो ”

आजकल बदमाश बहुत मर रहे हैं

पुलिस वाले दनादन ऐनकाऊन्टर कर रहे हैं

ऊपर से सख्त आदेश हैं

जिसके ऊपर अाठ-दस केस हैं

ऐंसा निशाना साधो

किसी को घायल करो

किसी को निपटादो ,

अपराध की दुनिया में बढ़ते कदमों को रोक दो

बदमाश जहाँ दिखे,  सालों को ठोक दो

काश पहले से सरकारों ने इतनी सख्ती

दिखाई होती

तो आज प्रदेश की जनता आराम से सोती

आज जिधर देखो उधर मर्डर, लूट ,डकैती

हो रहे बलात्कार हैं

इसकी कुछ हद तक सरकारें भी

जिम्मेदार हैं

इस बात को कहते हुए मुझे ना ही कोई गिला है

इन बदमाशों को संरक्षण भी तो नेताओं से मिला है कुछ नेता तो इनको पालते हैं

खुद ही इनको जेल भेजते हैं

और खुद ही निकालतें हैं

ये देखकर हम हताश हैं

अाधे से ज्यादा नेता तो खुद बदमाश हैं

गलत बात है क्या?  हमारी

जैसे अतीक अन्सारी

सब लोग मौन हैं

अाखिर इसका जिम्मेदार कौन हैं?

इस बात में दम है

इसके कसूरवार भी आप और हम हैं

ज्यादातर लोग मानते हैं

आधे से ज्यादा पुलिस वाले

चोर/बदमाशों को पहले से ही जानते हैं

ये लोग भी अपना कर्तव्य सही से सम्भालतें हैं

इनको पहले से ही पता होता है

डकैती किसके घर होगी

और कौन-कौन डालते हैं

बना बनाया किस्सा होता है

चोरी के माल तक में इनका हिस्सा होता है

पुलिस चाहे तो बदमाशों की नाक में दम

कर सकती है,

अपराध को बहुत कम कर सकती है

कुछ लोग कहते हैं मुश्किल है

इसका उदाहरण के.पी.एस गिल हैं

पुलिस की ताकत को दिखा दिया था

पंजाब से आतंकवाद को मिटा दिया था,

लिखते -लिखते थक चुके हैं

सबके सब बिक चुके हैं

सच बता रहे हैं,

आजकल तो लोग न्याय पालिका पर

भी उँगली उठा रहे हैं

लोकतंत्र हिल रहा है

जो सबका इन्साफ करते हैं

उन्हीं को ही इन्साफ नही मिल रहा है

कहीं-कहीं ऐसे मजिस्ट्रेट/जज भी

दिख जाते हैं ,

चन्द पैसों में बिक जाते हैं,

ऐसे मामले भी देखे जाते हैं

कोर्ट में गवाह खरीदे -बेचे जाते हैं

कुछ दबाब में टूट जाते हैं

इसलिए मुल्जिम छूट जाते हैं

मैं सच कह रहा हूँ ना बताइए

कुछ कानून में बदलाव होना चाहिए

अाज के लिए इतना ग्यान ही पर्याप्त है

ऐनकाऊन्टर के डर से बदमाशों में

थोड़ा-बहुत तो भय व्याप्त है

एक ही सूरत है

पुलिस को पूरी छूट देने की जरूरत है

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