#Kavita by Dipak Charlei

भी तो लोग पुलिस से बचते हैं”{हास्य व्यंग्य}

 

हमारे गाँव के पास

मिली एक इंसान की लाश,

दुर्गंध तो आनी थी

लाश को देखकर ऐसा लग रहा था

जैसे वो चार -पांच दिन पुरानी थी

लोग उसके पास से गुजर रहे थे

किसी अनहोनी की वजह से डर रहे थे

हमने भी डरते,डरते थाने किया फोन

तो उधर से कडक आवाज आई

हाँ, भई कौन ?

बताइए क्या काम है।

कैसे याद किया और क्या नाम है

मैं बोला, तभी

जी मैं बोल रहा हूँ दीपक चार्ली हास्य कवि

देखिए साहब,

हमारे गाँव के पास एक लाश पड़ी है

चार-पाँच दिन पुरानी है इसलिए सडी है

आप जल्दी से आ जाइये

पुलिस वाला बोला -हम दो घंटे में पहुँच रहे हैं

आप वही पर रूक जाइये

हमने सोच लिया कि अब हमें

पड़ेगा जान को बबाल,

पुलिस वाले पूछेंगे ,तरह तरह के सवाल

मन में सोच ही रहे थे कि अब क्या होगा?

थोड़ी देर बाद ही पहुँच गए

चार सिपाही और एक दारोगा,

दरोगा जी हमसे बोले -कवि जी इधर आइये

लाश को पहचानते हो या नहीं?

इसकी शिनाख्त करवाईये

देख नही रहे आज कितनी ठन्डी और सर्दी है

मुझे तो लगता है

तुम्हें ही इन लाशों से ज्यादा हमदर्दी है

तुम्हारा क्या चला जाता,

अगर तुम चार दिन ओर इस लाश को ना बताते,

अरे! कुछ लाश मिट्टी में मिल जाती,

और कुछ को कुत्ते ले जाते

आपको ही बनाते हैं, चश्मदीद गवाह

खानी भी पड सकती है

मिस्टर जेल की हवा

इधर आओ, लाश को इक्कठा करो और

पंचनामा भरवाओ

फाड़ क्या रहे हो दीदे ?

चार डन्डो में हो जाओगे बिल्कुल सीधे

अपने आप को कवि बताते हो

तुम जैसे लोग ही तो

आजकल मर्डर कराते हो

अरे! जल्दी करो कांस्टेबिल यादो

इस लाश को भी इसी के कन्धे पर लादो

ये ही इसको ढोगा

ये मरा है या मारा है

पहले इसका पोस्टमार्टम होगा

इस घटना के बाद लोग मुझे देखकर हँसते हैं

तभी तो इंसान इन पुलिस वालो से बचते हैं

 

हालिया प्रकाशित हास्य व्यंग्य पुस्तक”तारीख पे तारीख मिली है” से

दीपक चार्ली हास्य व्यंग्य कवि एवं अधिवक्ता

मुरादाबाद( उत्तर प्रदेश)

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मो० न० 9719875702

 

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