#Kavita by Diwakar Maurya

आज रात तो मै

डर ही गया

किसी की साज़िस का

भनक लग गया

मेरा क़त्ल करने का

बेदर्दी का इरादा था,,

पर कुछ अजीब औज़ार थे

पर ना चाकू ना तलवार ना बारूद

ही थे

वो तो बस नशीली आँखों

का हथियार था

और साथ ही खुली जुल्फों का

भी साथ था,,

अल्लाह के नेकी ने

मुझे बचा लिया

पर ऐसा क्यों लगता है

वो रूह को निकाल कर

अपने साथ ले गया,,

अल्लाह उसे देख के

उसके कायल से हो गये

तभी तो उसे देख के

उसके साथ ही हो गयेे,,

भूल गये दिवाकर का एहेतराम

और नमाज़ से पहले ही

मुझे बेरूह कर गये….

By: Diwakar Maurya

One thought on “#Kavita by Diwakar Maurya

  • March 30, 2018 at 11:46 am
    Permalink

    Gajab bro..

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