#Kavita by Dr Abha Mathur

मेरा गाँव++++++

गाँव में मेरा राजमहल है

मिट्टी  का घर

ग्रीष्म  में ठंडा,गर्म ठंड में

बिन बिजली का एसी है

वृक्ष नीम का मेरे द्वारे

सर-सर हवा दिये जाता है

ना बिजली जाने का डर है

ना कोई बिल आता है

वृक्ष नीम का मेरे द्वारे

छोटे छोटे पत्तों से तालियाँ

बजा कर स्वागत करता

ज्यों हम से बतियाता है,

चादर हरियाली की

नैनों को सुख,मन को

ठंडक देती

कष्ट ताप मन के हर लेती

कुएं का पानी,पम्प का पानी

गर्मी में शीतलता देता

जाड़ों में गर्म सा लगता

सभी सुखों की छाँव है।

ऐसा मेरा गाँव है।

डॉ.आभा माथुर

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