#Kavita by Dr Abha Mathur

अलौकिक प्रेम+++

प्यार, मोहब्बत , उल्फ़त कह लो

या फिर कह लो इश्क़

दिल से दिल के आकर्षण

का नाम दूसरा  प्रीत

भक्तों ने इस रस को जाना

चखा  और  अपनाया

कवियों ने भी प्रेम- सुरा का

स्वाद  अद्भुत  बतलाया

गिरा वासना की दलदल में

कीचड़ से लथपथ  था

सूफ़ियों ने दिया सहारा

स्वच्छ   किया   अपनाया

प्रभु का जीव जगत  को सर्वोत्तम

उपहार  है  प्रेम

जीव  जन्तु  भी बँध जाते

वह  रेशम  डोर  है प्रेम

मानव का मानव से, प्रभु से

प्रभु  की कृतियों  से भी

सार जगत का ,ज्योति पुंज है

यह  अलौकिक  प्रेम

डॉ. आभा माथुर

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