#Kavita by Dr. Abnish Singh Chauhan

माँ –

……..

घर की दुनिया माँ होती है

खुशियों की क्रीम

परसने को

दुःखों का दही बिलोती है

 

पूरे अनुभव

एक तरफ हैं

मइया के अनुभव

के आगे

जब भी उसके

पास गए हम

लगा अँधेरे में

हम जागे

 

अपने मन की

परती भू पर

शबनम आशा की बोती है

घर की दुनिया माँ होती है

 

उसके हाथ का

रूखा-सूखा-

भी हो जाता

है काजू-सा

कम शब्दों में

खुल जाती वह

ज्यों संस्कृति की

हो मंजूषा

 

हाथ पिता का

खाली हो तो

छिपी पोटली का मोती है

घर की दुनिया माँ होती है

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