#Kavita by Dr. Dashk B Pattya

शुभ दिपावली”

 

 

शुभकामनाएँ है मेरी तुमको अब की एँसी हो दिपावली||

दिप जले खुशियो के घर-घर हिन्दधरा पर हो खुशहाली||

 

 

धन-दौलत, शुख-समृद्धी आये दरिद्रता नित गमन करे|

कलह-कलेश कभीन तुम पर अपने विष का वमन करे|

मिले सफलता हर पग तुमको मँजिल स्वयँ कदमो मे आये|

एँश्वर्य एँसा हो तुम्हारा स्वर्ग तुम्हे घर मे ही मिल जाये|

आशिष रहे माँ लक्ष्मी का तुम पर कुबेर भरे झोली खाली|

शुभकामनाएँ है मेरी तुमको अब की एँसी हो दिपावली||1||

 

 

शत् बरस तक जिये सिपाही कृषको की जय जयकार हो|

सदबुद्धी दे शासन को ईश्वर युवाओ के सपने साकार हो|

करे तरक्की किसान चौगुनी और कभी न वो विषपान करे|

विजय ध्वजा लहराएँ हिमालय सीमा न सैनिक के प्रान हरे|

बुझे न दिप किसी के घर भी करे विधाता ईनकी रखवाली|

शुभकामनाएँ है मेरी तुमको अब की एँसी हो दिपावली||2||

 

 

जो विरोध करे दिपोत्सव का ईस खादी की चालबाजी पर|

चीनी झालर से घर सजाते रोक लगाते आतिशबाजी पर|

दिप जले तो होगा प्रदुषन और न चलाने दे पटाखे बम|

शत्रु घेरे चौराहे पर उनको उनके घर बरसे परमाणु बम|

डुबे उनकी नैया भवर मे और घर मे उनके छाये कँगाली|

शुभकामनाएँ है मेरी तुमको अब की एँसी हो दिपावली||3||

 

 

 

डा. दक्ष बी.पटैया

माँण्डवी/बैतुल(म.प्र.)

मो.न.9479351986

9179455171

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