#Kavita by Dr. Dashk B Pattya

कितने रँग बिरँगे मौसम अपने सँग मे लाई हो|

तुम मेरे जिवन मे जैसे नव प्रेरणा ले आई हो||

 

 

दिशा हिन था ये जिवन ना मेरे पथ मे रोशनाई थी|

बुझे दिप सा था मै ना मैने कोई ज्योति जगाई थी||

फर्ज भुलकर अपने मै अटका दुनिया के परपँचो मे|

बुरी तरह से फसा हुवा था सपनो के सिकँजो मे||

तड़प रही प्यासी धरती पर तब तुम सावन सी आयी हो|

तब तुम मेरे जिवन मे जैसे नव प्रेरणा ले आई हो||1||

 

 

पुर जोर गम की शदिया और अँधेरी रात थी|

तन्हाईया थी जिवन मे उन दिनो की बात थी||

व्यथीत भटकता मन अँदर से खाली-खाली था|

हर निगाह मे मेरा जिवन केवल एक सवाली था||

निश्तेज प्राण मेरे अँतर मे तुम चेतना ले आई हो||

तुम मेरे जिवन मे जैसे नव प्रेरणा ले आई हो||2||

 

 

खत्म हुई तन्हा राते, अब सुर्य क्षितिज पर आया है|

राहाँ ढुडता जिसको जिवन भर, वो तुम मे मैने पाया है||

अब मुझमे हर पल बस तुम ही तुम होती हो|

फुटी शिप मे भी जैसे सुँदर-सुँदर से मोती हो||

ये तुमसे है जबसे तुम प्रकाश पुँज सी मुझपर छाई हो|

तुम मेरे जिवन मे जैसे नव प्रेरणा ले कर आई हो||3||

 

 

दक्ष बी. पटैया ,माण्डवी(बैतुल)म.प्र.  –  9179455171

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3 thoughts on “#Kavita by Dr. Dashk B Pattya

  • October 1, 2017 at 5:22 am
    Permalink

    Good Bahut Mast Hai

  • October 1, 2017 at 8:50 am
    Permalink

    धन्यवाद अर्जुन अमरुते जी

  • October 20, 2017 at 4:26 pm
    Permalink

    अति सुंदर कविता भैया दक्ष जी

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