#Kavita by Dr. Krishan Kant Dubey

आस्था के भरोसे

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हवा को महसूस करो

ईश्वर की खुशबू

वह महकता है और अपनी महक से

पूरी दुनिया को महकाता है.

 

सूरज की किरणों में महसूस करो

ईश्वर की चमक

वह चमकता है और अपनी चमक से

पूरी दुनिया  को रौशन करता है.

 

नदी की धार

और

समन्दर की लहरों में

ईश्वर की गति महसूस करो

वह बहता है

वह लहराता है

जो डूबते हैं उसके अखंब जलस्तर में

वह उनको संसारिक सतह से दूर

अलौकिक संसार में ले जाकर सुखानुभूति कराता है.

 

सच में उसकी अनुभूति

उसके प्रति अभिव्यक्ति

और उसमें डूबने वाली भक्ति

जिनके अंतस में जन्मती है

उन्हीं को मिलती है

ईश्वर की खुशबू/चमक और लहरों का आंतरिक बहाव

हम हैं आस्था के भरोसे

*     *

डॉ.कवि कृष्ण कान्त द्विवेदी

कन्नौज

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