#Kavita by Dr Naresh Sagar

गीत

* एक बार माँ हसकर खालो *

दिल जो चाहे सब मंगवालो

एक बार माँ हसकर खालो

दिल जो चाहे ……………

दूर हुई दु:ख वाली दुनिया

अब ना कर्जा मांगे बनिया

बडे हुए सब बेटे तेरे

डलवा डाले सब के फेरे

मत चिंता में खुद को डालो

एक बार माँ हसकर खालो ………

 

झाडू ,बर्तन , चौका ना कर

बैठ खाट पै आर्डर तू कर

घर की थानेदारी कर ले

माँ अपनी बांहो में भरले

पनीर खाओ या दाल बन वालो

एक बार माँ हसकर खालो ……..

 

तू ही घर की पी.एम., सी.एम.

पोती , पोते कहते डी.एम .

रूतवे से कुर्सी पर बैठो

जिससे चाहो उससे ऐंठो

जैसा चाहो सब कर वालो

एक बार माँ हसकर खालो ………

 

हम गलती के पुतले ठहरे

फिर भी माँ तेरे ठहरे

तेरी बहुत जरूरत घर को

एक बार माँ देख इधर को

अपनी सारी जिद्द मनवालो

एक बार माँ हसकर खालो ……..

 

तू ही अल्लाह , तू ही ईश्वर

चर्च और गुरू द्वारा तू है

तेरे बिन उपवन ये झूठा

महके अम्मा जब तक तू है

कहानियों की अपनी अम्मा

रोज एक पाठशाला लग वालो

एक बार माँ हसकर खालो

एक बार माँ हसकर खालो !!

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बैखोफ शायर/गीतकार/लेखक

डाँ. नरेश कुमार “सागर”

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