#Kavita by Dr Naresh Sagar

दो साल पहले हमें हमारे पापा जी छोडकर चले गये थे

बहुत याद आ रही है पापा जी की

***

तुम गये तो प्यार गया

डाट गई

हिम्मत गई

और

खुशी गई

और

गया मेरा

वकील

जो करता था मेरी हर अच्छी और बुरी बात की पैरवी

सच तो ये है

आज आप मेरे पास बेशक नही है

मगर

आपकी दी हुई हर नसीहत मेरे पास है

जो आपके होने का एहसास कराती रहती है

पापा जी

आप की उम्मीदों को मै

पूरा करने की हमेशा कोशिश करता रहूंगा

आप की तस्वीर मै जब भी

देखता हूँ तो मुझे ऐसा लगता है आप कहीं गये हुए है

आपके होने का एहसास ही

मेरे कदम आगे बढाता रहता है!

पापा आप थे तो मै हूं

और मै आपके सपने पूरा करने की हमेशा कोशिश करता रहूंगा

आपका बेटा…

डाँ. नरेश कुमार “सागर”

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