#Kavita by Dr. Parag Jarodia

अटूट तेरी आस हो,अथक तेरे प्रयास हो
पाँव हो धरा पे,तेरी सोच में आकाश हो |

भीड के पीछे न चल,ये भीड तेरे साथ हो
तू शांत से समंदरों में,लहरों का आगाज़ हो |

रूके न तू,झके न तू ,न तू कभी निराश हो!
चंद्र सा शीतल रहे तू ,सूर्य का प्रकाश हो |

मिले हार जीवन में अगर,तो भी न हताश हो
गिर के फिर उढेगा तू ,खुद पे जो विश्वास हो |

आलस्य के वातावरण में, शंख की तू नाद हो
साध जीवन को ऐसे,व्यक्तित्व का विकास हो |

स्वभाव से विनम्र हो तू ,वाणी में मिठास हो
कभी जो बोल पाए न, उनकी तू आवाज़ हो |

हौंसलों पे हो भरोसा, मन में सुविचार हो
छोर तक वसुंधरा के, कीर्ति विस्तार हो |
“”” पराग “””

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