#Kavita by Dr Poonam Matia

पहला प्यार-पहली मुलाक़ात

धूप थी तेज पर कहाँ लगी
देर तो हुई पर खड़ी रही
दिल घड़ी की टिक-टिक-सा
धड़क-धड़क कर बता रहा
आज कोई मिलने को आ रहा|

थी यूँ तो पहली मुलाक़ात
भीतर ही भीतर पर कितने पहर
बीते संग-संग आगोश में
सांसों की लय पर गुनगुना के
सपनों की तरह आँखों में सजा के
जागे हुए सोयी, और सोते में जागी-सी|

इश्क़ का पहला सोपान था
उठता भीतर ही भीतर तूफ़ान था
बिन मिले समा गया कोई रूह-सा
बिन छुए महका दिया कहकशा
ऐसा सुरूर छाया था गात पर
लहराए लता जो हलकी-सी वात पर

आई है आखिर अब वो घड़ी
रहे उसकी राह पर नज़र गड़ी
आये! आये! अब आ भी जाए
कैसे, कितना को दिल को समझाए
अब तो सजन मिलने को आये
मधुर मिलन की पहली बेला
बैठी हूँ पथ में पलके बिछाए
…….. डॉ पूनम माटिया

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