#Kavita by Dr Prakhar Dixit

जय देव गजानन नमो नम:

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हे लम्बोदर गिरजानंदन गजकर्ण गजानन भयहारी।

जय वक्रतुंड हे महाकाय  तुम सूर्य कोटि  आभाकारी।।

हे अग्रगण्य जय देव नमो  भव शोक विषाद विनाश करो,

हे प्रखर बुद्धिदाता वंदन मति शुद्धि करो मंगलकारी।।

 

गण श्रेष्ठ गणाधिपती भगवन जय  चतुर्भुजा प्रभु शुभदाता।

मूषक वाही तव  प्रखर प्रज्ञ शुभ भाल तिलक मोदक भाता।।

अक्षत रोली दूर्वा अर्चन पल्लव घट रुपम् पूज्य प्रभू,

कर मोदक पाश त्रिशूल धरे नारद ऋषि नेति नति गाता।।

 

गौरीसुत रिद्धि सिद्धि दायक हे सिद्धि विनायक सिद्धि करो।

माया बंधन भवकूप अंध अध नाश सभी त्रय ताप हरो।।

चौरासी फंद  बंध कटें मतिमूढ की आरत गिरा सुनो,

शरणागत प्रखर उबारो प्रभू साहस प्रण हिय पुरुषार्थ भरो।।

 

 

प्रखर दीक्षित – फर्रुखाबाद

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