#Kavita by Dr Prakhar Dixit

जय राधेश्याम

 

जय यदुराई किसन कन्हाई गोपी वल्लभ जय कृष्णा।

जय राधावर जय बंशीधर जसुदानंदन जय कृष्णा।।

जय योगेश्वर जय गोवर्धनधर मीत सुदामा जय राधे,

जय जय उपकारी जग हितकारी प्रखर शरण जय कृष्णा।।

 

~~         ~~

 

शोभित वनमाला जय नंदलाला पट पीत गरे।

तिरछी चितवन धर गोवर्धन बृजवासिन के सिग ताप हरे।।

रसिया छलिया मुरलीधारी हे द्वारिकेश सच्चिदानंद,

हिय बाँस करो त्रयताप हरौ प्रखर परस भवसिंधु तरे।।

 

====================

 

प्रखर दीक्षित

फर्रुखाबाद

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.