#Kavita by Dr Prakhar Dixit

धन्य धरा पावन भारत भू,
सरसती सौरभ मानस छू
विहँसती शारद रमा सदैव
रमे कण कण ईश्वर तू ।।

जहाँ नारी देवी का रूप
जहाँ अध्यात्म कर्म की धूप
संस्कारों में वैदिक सार
मिले उपमाओं में भी सूप।।

प्रणति सत भारत माँ को मीत
मधुरमय लोक राग संगीत
प्रखर रज राजे शौर्य बलिदान
गाऐं योद्धा रण के गीत।।

प्रखर दीक्षित
फर्रुखाबाद

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