#Kavita by Dr Prakhar Dixit

बाल रचना

चंदा मामा

चंदा मामा कब आओगे

रोज़ सांझ को आकर मिलते
बादल के संग संग तुम चलते
क्यों नहीं भोर में मुझे दीखते
अब तो छोड नहीं जाओगे।।
चंदा मामा कब ……,,..

चाँदी जैसा रूप सलोना
बढ़ते घटते कभी है खोना
ठंड हो गयी कोट सिला लो
होली तक कैसे रह पाओगे।।

आओ चुनिया आओ मुनिया
चिंटू डब्बू तुम बैठो कनिंया*
चिंटू मीठा साज़ बजाए
क्या मामा संग संग गाना गाओगे।।
चंदा मामा कब ……,,..

अम्माँ चंदा मामा लाओ
उसे थाल में हमें दिखाओ
आँख मिचौली हमसे करते
अब खीर पुआ संग में पाओगे।।
चंदा मामा कब ……,,..

प्रखर
फर्रुखाबाद

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