#Kavita by Dr, Pratibha Prakash

आर्यावर्त सप्त सैन्धव सिंहजीत भारत कहलाया है

इसकी पवन माटी को भारत माँ कहके पुकारा है

चरण पखारे लहराता सागर, हिमालय ने मुकुट सजाया है

पश्छिम में भू स्वर्ण कच्छ की, पूरब में गंग की अंतिम धारा है

इसकी पावन माटी……………………………………….

शक हूँण और यूनानियों ने इसका गौरव ही गाया हा

भले लूटने म्लेच्छ भी आये अंग्रेजों ने भी शीश झुकाया है

इसकी पावन माटी ……………………………………….

अखण्ड संस्कृति खण्ड सभ्यता अतुल्य श्रंगार सजाया है

शस्य श्यामला इस माटी को असंख्य वीरों को जाया है

इसकी पावन माटी……………………………………

विश्व गुरु हम शांति प्रणेता किन्तु शस्त्रों को भी उठाया है

बन रणचंडी औ हलाहल शिव का पिया गर्ल का प्याला है

इसकी पावन माटी ………………………………………..

देते चेतावनी अंतिम तुमको मात सहनशीलता आजमाओ

हम रना शिवा अशोक के वंशज भय को हमने हराया है

इस पवन माटी …………………………………………..

भूल जाओ केसर घटी को क्यों आतंक मचाया है

कायर नहीं हिंदुस्तान हर युद्ध में तुमको हराया है

इस पावन माटी ………………………………………..

आर्यावर्त सप्त सैन्धव …………………………………….

 

डॉ प्रतिभा प्रकाश

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