#Kavita by Dr. Sarla Singh

प्रकाश

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प्रकाश भर दे, तिमिर हर ले,

ज्योतिर्मय कर दे जगत को।

अज्ञानता तू हर ले जगत से ,

ज्ञानमय कर दे इस जगत को।

पशुत्व भाव दूर कर दे जन के,

जन -जन में सत्यभाव भर  दे ।

अब आ जगत में देर मत कर ,

निजसत्य को अब सिद्ध कर दे।

राक्षस हैं फिरते अब गली-गली,

जन मन अब नवशक्ति भर दे ।

पुनः अपनी रचना को समझ तू,

नर नारी की शक्ति समान करदे।

हो रहीं सदा से नारी ही प्रताड़ित  ,

नारी में अब तू नवशक्ति भर दे ।

कोई अरबों की सम्पत्ति पाता ,

कोई मरता है फुटपाथों पे भूखा ।

तू शक्तिमान है कैसे ये देखता  ?

ऐसे जनों की गरीबी दूर कर दे ।

प्रकाश भर दे ,तिमिर हर ले ,

ज्योतिर्मय कर दे जगत को ।

डॉ.सरला सिंह

 

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