#Kavita by Dr. Sarla Singh

 

मेरा भारत कभी दुनिया का नूर था ,

हर क्षेत्र में ही हर तरह से भरपूर था ।।

 

धन दौलत की ना कोई कमी थी यहाँ ,

शानो शौकत तो दुनिया में मशहूर था ।।

 

जग में विज्ञान  का था ये ज्ञाता प्रबल ,

फिर भी इसको ना खुद पे कोई गुरुर था।।

 

धर्म का भी लोहा माने हैं अब तक सभी ,

पर करता किसी को ना ये मजबूर था ।।

 

सत्य की जीत होती अहिंसा है परमोधर्म,

बात इसकी जमाने भर में ही मशहूर था ।।

 

डॉ.सरला सिंह

दिल्ली

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