#Kavita by Dr Sarla Singh

अभिलाषा

 

जीवन की इक छोटी सी

मधुरिम मेरी अभिलाषा है।

इसको पूरी कर देना प्रभु,

तुझसे मेरी इक आशा है।

यदि मैं धरापर फिर आऊँ,

बस इतना तुम कर देना।

धनदौलत चाहे मत देना,

कंटक पथ चाहे दे देना ।

माँ मेरी तू मुझको दे देना ,

बस इतनी सी चाहत है।

कोई पुण्य हो मेरा यदि ,

सारा माँ को समर्पित हो ।

कोई दुख उसको मत देना,

इतनी -सी मेरी चाहत है ।

जीवन ये है माँ का दिया ,

माँ के चरणों में अर्पित हो।

 

डॉ.सरला सिंह

 

 

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