#Kavita by Dr. Sarla Singh

जीवन का सफर

 

काश जीवन का सफर ,

इतना आसान ,

तो मुस्किल भी न हो।

राह में फूलों के ,

कतार न सही।

काँटों से भरी ,

घाटी भी न हो।

मंजिलें  आसान  हों ,

या मुश्किल।

हमारे हौसलों के ,

परे न हो ।

जीत और हार से ,

डरते न कभी ।

जीत तक जा न सके ,

ऐसा न हो ।

मेरे जज्बात के,

काबिल हो न हो ।

बिना जज्बात के ,

जीवन न हो।

परमात्मा को ,

माने या नही ।

पर  बिना  परमात्मा,

जीवन न हो ।

संग -साथी , हमराही ,

रिश्ते -नाते।

हम कदर  इनका ,

न करे ऐसा ,

जीवन न हो ।

काश ,जीवन का सफर ,

इतना आसान ,

तो मुश्किल भी न हो।

– डॉ. सरला सिंह

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