#Kavita by Dr. Sarla Singh

मानवता

मानवता ही है जग में,

परमधर्म है मानव का ।

मानवता के दिव्य आलोक में,

सब धर्म इसी पर टिके हुए ।

मानवतनधारी मानव है वो,

मानवता से सज्जित हो जो।

मानवताहीन जब वो हो जाये,

बस वही कहलाता राक्षस है ।

मानवतनधारी मानव तो ,

हर जीव में अपनापन देखे।

मानवता रग में जिसके बसा ,

जगकल्याण निरत रहता है सदा।

सबके दुख में बन जाये जो साथी,

बस वही है सच्चा मानव जग में ।

सबको देखे जाति धर्म से ऊपर,

मानवता उसमें है समाया हुआ ।

है मानवतनधारी मानवतावादी,

कहलाते देव समान वही ।

कर सकता है तो करना तुम,

जगका दिल से कल्याण मानव ।

मानवतावादी बन कर तू ,

मानव जीना इस जग में ।

मानवता धर्म का ही,

करना तुम पालन सदा ।

 

डॉ. सरला सिंंह ।

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