#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat

घोर कलजुग आग्या न्यू चिंता नै घेर लेई काया।

सब चीज छोटी पड़गी सबतै बड़ी बनी माया।।

 

गऊ, ब्राह्मण, गुरु की सेवा करनी छोड़ देई लोगाँ नै,

शर्म लिहाज तार कै धर दी, डोबी दुनिया इन भोगाँ नै,

दान पूण छोड़ दिया न्यू गात म्ह डेरा जमाया रोगाँ नै,

नींद उड़ री रातां की र सोच सोच सर चक्कराया।।

 

ब्याह होते ऐ माँ बाप ना चाहिए देखो या कार कोड़ होई,

बाहण, बुआ पराई लागी जो धोरै पल कै औड़ जोड़ होई,

सासु सुसरे, साढ़ू साली की आज चुल्हे ताहीं दौड़ होई,

ब्याह वाणे म्ह साला बना चौधरी कुणबा दूर बिठाया।।

 

स्वार्थ के म्हा भरी दुनिया सिर्फ आपणा भला चाहवै स,

सादा भोला मानस भई आज सारी ढालां छला जावै स,

आगै पाछै की सोचनीया दुखां कढ़ाही म्ह तला जावै स,

चोर, जार, बेईमान पिस्साँ तै इज्जतदार कुहाया।।

 

इस दमड़ी के पाछै लोगाँ नै तोड़ बगाये सब रिश्ते नाते,

जद ठोकर लागै उणकी आँख खुलै फेर पाछै तै पछताते,

गुरु रणबीर सिंह गा गा कै नै इस दुनिया नै समझाते,

सुलक्षणा लिखन तै लागी पर तन्नै लिखना ना आया।।

 

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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