#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat

मेरा क्या है?

सोचना कभी तुम इस बारे में

खोजना जवाब इस सवाल का

तुम्हारा सारा अहंकार उड़ जाएगा

तुम्हारा घमण्ड टूट कर बिखर जाएगा

जब इस सवाल का खोजने जवाब जाओगे

कड़वी सच्चाई से तुम्हारा सामना होगा

अहंकार की पट्टी आँखों से खुल जाएगी

और जीवन में एक नया उजाला होगा

बस एक यही सवाल है जिसका जवाब

हमें मोक्ष की प्राप्ति तक लेकर जाता है

सारी अकड़ निकल जाती है मनुष्य की

इस सवाल का जवाब खोजने में

इंसान को इंसान होने का अहसास दिलाता है

भटके हुओं को सही रास्ता दिखाता है

यह सवाल हां मजाक नहीं यह सवाल

मेरा क्या है?

जरा उतर कर देखो इसकी गहराई में

तुम्हारे हजारों लाखों सवालों का जवाब भी है

यह एक सवाल आखिर मेरा क्या है?

जिस दिन तुम इसका जवाब जान जाओगे

सिद्ध पुरुष महायोगी तुम कहलाओगे

छोड़ दोगे मोह माया अपने आप

त्याग दोगे मोह क्रोध लोभ अहंकार को

बस बचेगा तो तुम्हारे जीवन में बैराग

बैराग भी परमपिता परमात्मा का बैराग

“सुलक्षणा” जब उड़ने लगती है बुलंदी के आसमान पर

सवार होने लगती है अहंकार के घोड़े पर

तभी वो सोचने लगती है यही

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