#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat

सोचकर देखिए जरा, खेल किसका रचा हुआ है,

जो सुप्रीम कोर्ट के जजों में हड़कंप मचा हुआ है।

 

चौबीस जजों में से चार जजों को तकलीफ हुई,

क्या इसीलिए मीडिया का दरबार सजा हुआ है।

 

मीडिया के सामने आकर भी खुलकर बोले नहीं,

और बात करते हैं कि उनका ज़मीर बचा हुआ है।

 

मन में मेरे उठ रहे हैं चंद सवाल जरा गौर करना,

क्या कहना चाहते हैं, सुप्रीम कोर्ट बिका हुआ है।

 

क्यों नहीं मिले वो जाकर महामहिम राष्ट्रपति से,

लोकतंत्र के पिता का दर्जा जो उन्हें मिला हुआ है।

 

मुख्य न्यायाधीश को है अधिकार सविंधान पीठ का,

हर बिंदु का ज्ञान है उन्हें, जो जो वहां लिखा हुआ है।

 

राजनीतिक षड्यंत्र की बू आ रही है उनकी बातों से,

उन माननीयों के इस आचरण से देश हिला हुआ है।

 

क्यों नहीं आर्टिकल 124(4) के तहत कारवाई हो,

उनके कारण न्याय से आज विश्वास उठा हुआ है।

 

क्यों नहीं जज जाँच एक्ट 1968 के तहत जांच हो,

जो उन्होंने किया, ऐसा देश में पहली दफा हुआ है।

 

ये तकलीफ के विरुद्घ नहीं, अहम की लड़ाई लगी,

आज आम आदमी सोच रहा, क्या वो ठगा हुआ है।

 

राजनैतिक रोटियां सेंकनी शुरू कर दी नेताओं ने,

वोट बैंक अपना बढ़ाने का जो चश्का लगा हुआ है।

 

इंतजार के अलावा जनता कर भी क्या सकती है,

सच बाहर आएगा सुलक्षणा जो आज दबा हुआ है।

डॉ सुलक्षणा

 

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