#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat

चुरा चुरा कर अल्फाजों को वो महान हो गए,

लोग कहते हैं देखो वो मंचों की शान हो गए।

पढ़ते हैं दूसरों की कविताएं वो अपने नाम से,

कविता का क नहीं पता पर वो विद्वान हो गए।

 

पोल खुलने लगे जब, बनाते हैं बहाने बड़े बड़े,

कहते हैं, लिख देते हैं ऐसी कविताएं खड़े खड़े।

ऐसी कविता लिखी होगी उसने ये हो सकता है,

फिर बात टालते वो सुनाकर चुटकुले सड़े सड़े।

 

सोशल मीडिया पर भी खूब तहलका मचाते हैं,

दूसरों की कविताएं अपने नाम से चिपकाते हैं।

कोई टोक देता है जब उन्हें इस बात पर वहाँ,

पोस्ट डिलीट कर उसे वो ब्लॉक कर जाते हैं।

 

देखा नहीं कभी शब्दों को कागज पर उतार कर,

जाने कैसे जिंदा हैं वो अपने ज़मीर को मार कर।

माँ शारदे का साक्षात आशीर्वाद मिला हुआ है,

“सुलक्षणा” लिखती है कविता सोच विचार कर।

डॉ सुलक्षणा

 

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