#Kavita by Dr Sulaxna Ahlawat

मौत से चल रही है आर पार की जंग,
देखकर बुलंद हौंसले वो रह गयी दंग।
बोली ऐसा विराट व्यक्तित्व देखा नहीं,
क्या करेगा यहाँ रहकर चल मेरे संग।

इतना सुनकर शेर की तरह दहाड़े वो,
सुनाने लगे जिंदगी के कुछ पहाड़े वो।
नहीं छोड़ना चाहता वतन ए मिट्टी को,
तू छोड़ दे मुझे, ये कहकर चिंघाड़े वो।

इस मिट्टी में कुछ दिन तू बिताकर देख,
महक उठेगी तू, तिलक लगाकर देख।
साथ ले जाना भूल जाएगी जिंदगी को,
ऐ मौत! मेरी बात को आजमाकर देख।

पहले भी आई थी तू मुझे आजमाने को,
चुपके से अपने संग में मुझे ले जाने को।
भूल गई उस वक़्त भी तूने मात खाई थी,
जगह नहीं मिली थी तुम्हें मुँह छिपाने को।

माना की जीतेगी तू लेकिन मैं क्यों डरूँ,
भारत माँ का लाल हूँ, तेरा सामना करूँ।
“सुलक्षणा” भी जानती है तेरी उम्र ही क्या,
तेरे आने के भय से पल पल मैं क्यों मरूँ।

©® डॉ सुलक्षणा
आदरणीय अटल जी को समर्पित

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