#Kavita By Dr Sulaxna Ahlawat

हे प्रभु! आज खोल देना तुम स्वर्ग के द्वार,
सच्चा कर्मयोगी पहुंच रहा है तेरे दरबार।

आखिरी साँस तक कर्म वो करता रहा,
लड़ता रहा बीमारी से, मानी नहीं हार।

उसकी सादगी के सभी कायल थे यहाँ,
जनता से जुड़कर चलाता रहा सरकार।

राष्ट्रहित में जीवन समर्पित कर दिया,
करता रहा सदा वो जनता का उद्धार।

प्रभु तुमसे क्या छिपा है, जो मैं बताऊँ,
बस मेरी विनती पर कर लेना विचार।

अपने चरणों में स्थान देना प्रभु उन्हें,
मोक्ष प्रदान करना उन्हें सच्चे करतार।

“सुलक्षणा” दे रही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि,
सीखा गए वो सादगी ही जीवन आधार।

©® डॉ सुलक्षणा

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