#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat

कह कै न्यू कोई बात ना तन्नै देख लूंगा तड़कै,

फेर न्यू ऐ खेलण लाग जाया करदे हाम अड़ कै।

दो मिनट की कुट्टा करकै फेर अब्बा करा करदे,

एक के एक रहया करदे हाम खूब लड़ झगड़ कै।

 

आज जब याद आज्या स वो टैम आँसू रुकदे ना,

ढब्बियाँ तै फेटण खातर म्हारै गले आज सुखदे ना।

सब कुछ पीस्सा ऐ होग्या आज म्हारी खातर आड़े,

पिसां खातर यारी का गला काटन तै बी चुकदे ना।

 

बेरा ना वो टैम कड़े खूगा क्यूँ हटकै वो आंदा ना,

नयी पीढ़ी के चेहरै प वो भोलापन आज पांदा ना।

म्हारै टैम अर आज के टैम म्ह घणा फर्क आ लिया,

रोज कोशश करिये स म्हारा टैम भुलाया जाँदा ना।

 

सोचूँ सूं मानस के चाहै तै बख्त ठहरता क्यूँ कोण्या,

जै बख्त ठहरता नहीं तै उल्टा बी फरता क्यूँ कोण्या।

सुलक्षणा समझुं सारी बाताँ नै पर यू मन बेईमान स,

सोचिये उन दिनां नै याद करै बिना सरता क्यूँ कोण्या।

 

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