#Kavita by Dr. Yasmeen Khan

बैठे हो तुम ऐसे क्या।

ख़त्म हुए हैं पैसे क्या।।

 

कुछ तो ख़ुद भी सोचा कर।

बात-बात में कैसे, क्या।।

 

मिल जाते हैं सचमुच ही।

ऐसे को भी वैसे क्या।

 

और न बुद्धू मिल पाये।

तुमको मेरे जैसे क्या।।

 

नाम, पता तो होगा कुछ।

ऐसे, वैसे, कैसे, क्या।।

डॉ.यासमीन ख़ान

 

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