#Kavita by Garima Singh

पिता

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मुझसे रास्ता पूछने वाले मुझे चलना सिखाते हैं
जो खड़े भी न हो पाये हैं मुझे संभलना सिखाते हैं
इसी भ्रम में कि इन परों ने उड़ान ऊंची भरी है
जिसके दम से उड़े हैं ये उसे ही ठहरना सिखाते हैं
खबर नहीं की नई कपोलें दरख्तों के दम से ही आएंगी
ये बैठे जहां उसे ही कुतरना सिखाते हैं
“बाबा बदलो तुम भी देखो दुनिया बदल रही है”
और इस तरह हर कुतरन को बदलना बताते हैं
मैं खामोश चुपचाप निस्तब्ध सा युं देखता
मेरी किलकारियां ही मुझको चुप रहना सिखाते हैं

Garima Singh

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