#Kavita by Garima Singh

बीत गए दिन कहने सुनने के, जो सुन ले बुरा माने सोई। चुप रहना बस चुप ही रहना,हर सच्ची बात ना कहना

सच क्या है और झूठ है क्या, ये भी ना पहचाने कोई।।

मुस्कान की चादर ओढ़ ही लेना, दर्द तेरा जब और बढ़े

देखना इसको गलती से भी, देख ना ले ना जाने कोई।।

दुनिया की है नजर बुरी, और ज़ख्म तेरा नायब बड़ा

परदा कर कुछ युं इसपर, ना जाने और ना पहचाने कोई।।

अश्कों को कुछ तहजीब सिखा, युं ही कहीं निकलते नहीं

बेपरदा आँखों को कहीं, लग जाये ना आजमाने कोई।।

बाद तेरे टूट जाने के , साथ कोई खड़ा होगा नहीं, कि

यहां टूटा हुवा गुलदस्ता भी, नहीं लगता है सजाने कोई।।

तहरीरें भी वही देंगे, बाबस्ता जिनके ये जख़्म मिला

चोट देते हैं हर बार जो हाल पूछने भी लग जाते वो ही।।

गरिमा सिंह

 

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