#Kavita by Garima Singh

ये इतवार है कि जैसे संयुक्त परिवार की बड़ी बहू।
शिकायतें भी इससे फ़रमाइशें भी इससे।
नुक्स छह दिनों के बोझ का ये अकेला ही उठाता है।
फिर भी गिले शिकवे और ख्वाहिशें भी इससे।
दिन ये पहला सप्ताह का हकदार उसी सम्मान का है।
पर सप्ताहांत बना सारी गुंजाइशें भी इससे।
सोचो कैलेन्डर से जो कभी इतवार गायब हो जाये।
कैसे करोगे मनमानियां और शरारतें भी इससे।
Garima Singh

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