#Kavita by Garima Singh

हिन्दी  हैं  हम  वतन  है,  हिंदोस्तां हमारा !

हिन्दी   बोलना  पर,  हमको  नहीं गंवारा !!

मिट जाय चाहे हस्ती, हमको नहीं फिकर है!

अंग्रेजी अब ये मन भी औ खून भी हमारा !!..

सब शास्त्र और कथाऐं खूब हम पढ़ेंगे, बस

Oxford से हो आया किताबों का वो पिटारा!!

ब्यास, वाल्मीकि, चाणक्य  या कि तुलसी,

इन्हे ही लिख के लाये, कोइअंग्रेज का दुलारा!!

तब चाह भी जगेगी, पढ़ लें और समझ लें!!

फिर चाहे वो मरोड़े इतिहास भी हमारा .. !

हिंदी   हैं   हम   वतन है,    हिंदोस्तां हमारा!

हिन्दी   बोलना  पर,  हमको  नहीं गंवारा!!

गरिमा सिंह

3 thoughts on “#Kavita by Garima Singh

  • June 25, 2018 at 2:21 pm
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    bahut achha aur sachha likha hai.

  • June 25, 2018 at 2:23 pm
    Permalink

    bahut achha aur sachcha likha hai.

  • June 25, 2018 at 2:25 pm
    Permalink

    bahut achha aur sachhha likha hai.

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