#Kavita By Garima Singh

घर के ही कुछ भेदी हैं अरि के दिल से दिल मिलाते हैं
फिर इल्ज़ामों की गोटी फेंक वो ठहाके मौन लगाते हैं
आसान बहुत है प्रश्न उठाना बैठे बैठे ललकार लगाना
जो कई बार है धूल चटाया क्यों बस उसको ही आजमाते हैं
ललकार और ये तल्ख़ सभी इन प्रश्नों के अंगार सभी
हत्यारों संग मिलने वालों पर क्यों नही भला बरसाते हैं

कलम जब भी लिक्खे तो वो इन्कलाब या इंसाफ हो
किसी कमजर्द को सबब लिखे और गुमराह को सही राह हो
दर्द लिखे तो दवा हो और लहू लिखे तो आग हो
मगर ध्यान हमेशा बस रहे इतना
किसी रखवाले की छींटाकशी से कलम की नोक न कभी खराब हो
जय हिन्द जय हिन्द की सेना
गरिमा सिंह

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