#Kavita by Garima Singh

.    बहुत ही याद आते लोग अपने

गगन के पार है जिनका ठिकाना!

 

भले वो दूर हैं नजरों से अपने,

नही दिल से गया उनका ठिकाना!

 

गये होंगे ही लाखों मगर,

वो उनका वक्त से पहले युँ जाना,

 

कि जैसे घोंसले  में छोड़ बच्चे

किसी पंछी का युँ गायब हो जाना,

 

कि जाने कौन अब उड़ना सिखाये

लाये कौन उनके मुह को दाना,!

 

बहुत ही याद आते लोग अपने.

गगन के पार है जिनका ठिकाना!

 

और

 

नही पितरों की अब परवाह किसी को

न चाहे कोई कौवों को खिलाना!!

 

” मुण्डेरों पर मेरे कौवे ना आते ”

मिला उनको है देखो ये बहाना!!

 

गयी घुल सभ्यता पश्चात्य सब में

नही वेदों को अब पढ़ना पढ़ाना!!

 

करे अब याद उनको कौन देखो

गगन के पार है जिनका ठिकाना!!

 

गरिमा सिंह

 

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