#Kavita by Garima Singh

दिल जो फिर से बच्चा होता

सोचो कितना अच्छा होता!!

दिल में झूठ कपट न होता

सब कुछ केवल सच्चा होता!!

चन्दा अपना  मामा  होता

और सूरज अपना चच्चा होता!!

दिल को अपने बस प्यार हि आता

नफ़रत में थोड़ा कच्चा होता!!

पल में रूठे को मनाना होता

वो झगड़ा भी इतना कच्चा होता!!

 

गरिमा सिंह

 

जरुरतें पूरी हो जिससे वो चादर कम ना पड़े ख्वाहिशों के पैर जरा सिकोड़  लूं जो!

जख्म कोई कभी तकलीफ ना दे शायद  दर्द से रिश्ता गर कोई जोड़ लूं जो!

क्या पता सिसकियां भी गुनगुनाने लगे किसी के गम में  रोना छोड़ दूं जो!

क्या होती दिवाली ये तब जानू मैं गरीब गलियों से नाता कोई जोड़ लूं जो!

कीमत रोशनी की तभी समझूं  गर अंधेरे की तरफ रुख अपना मोड़ लूं जो!

कोई गैर नजर आयेगा ही नहीं उनमे अपनो को ढूंड़ना छोड़ दूं जो!

गरिमा सिंह

 

 

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