#Kavita By Gauraav Gupta

उम्रदराज★■

निगाहों से उनकी जवाँ हो रही हूँ
मेरी उम्र की गणित कमजोर हो चली है,

छूटा है मुझसें मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा,
बस उन्हीं ही लम्हों को बटोरनें चली हूँ,

बेनाम से हारें है सब नाम के रिश्तें,
उन नाम के सहारें अब हँसने लगी हूँ,

मिटानें को मुझकों सब आतुर हुए,
बस खुद को संभाले तुम्हारें ही लिए हूँ।

जी चाहता है तूझकों बसा लूँ दिल में,
रोकीं जाँ को इस रूह में तुम्हारें लिए हूँ।।

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