#Kavita by Gaurav Gupta

स्याहीं
ख़र्च करता,
हूँ अक्सर,
तेरी यादों की,
स्याही…..

हैं देती,
क़लम ये,
इस बात की,
गवाही…..

बैठों न,
संग मेरे,
कहाँ तुझकों है,
मनाहिं…..

शर्ट पे मेरी,
चाय के धब्बे,
गज़ब के प्रेम की ,
करतें उगाहीं…..

खत्म होती,
जो मेरी,
दवात की,
स्याही…..

मिलता हूँ,
चुपकें से,
तेरे ज़ुल्फों की,
स्याहीं….

गौरव गुप्ता
महेश नगर लालगंज रायबरेली।
7754828698

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