#Kavita By Gaurav Gupta

गौना….खुशियों का।।

पूछता है मुझसें,
मेरे घर का वो कोना,
कब आयेंगा मेरे घर,
तेरे घर से गौना,

इंतज़ार की घड़ी,
घड़ी न रही अब,
छिड़ चुकीं ज़िंदगी में,
वनवास की लरी अब,

देहलीं पे बैठीं,
निहारतीं रहूँ बस,
कब अस्त हो ये सूरज,
फिर खिलेगा घर अपना,

सवाल एक अंतिम,
बस पूछना है मुझसें,
दी परीक्षा सीता नें,
क्या मुझें भी है देना।।

गौरव गुप्ता
महेश नगर लालगज रायबरेली
7754828698

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